आयुर्वेदिक दवाइयां कैसे बवासीर की बीमारी को ठीक करती है ?

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आयुर्वेदिक दवाइयां कैसे बवासीर की बीमारी को ठीक करती है ?

  • April 19, 2024

  • 213 Views

मनुष्य का शरीर कई तत्वों में मिल कर बनता है। तरह-तरह के तत्वों से मिलकर बने होने के कारण उसको कई तरह की बीमारियों का भी सामना करना पड़ता है। तो इनमे से उत्पन हुई एक बीमारी जिसे बवासीर के नाम से जाना जाता है। तो हम बात करेंगे की आखिर बवासीर की बीमारी को कौन-सी आयुर्वेदिक दवाइयों की मदद से ठीक कर सकते है।

बवासीर की बीमारी क्या है ?

बवासीर की बीमारी काफी खतरनाक है जिसके बारे में हम निम्न में बात करेंगे ; 

  • पाइल्स एक ऐसी बीमारी है जिससे पीड़ित व्यक्ति को एनस के अंदर और बाहरी हिस्से में सूजन आ जाती है। जिसकी वजह से एनस अंदरूनी हिस्से या बाहर के हिस्से में स्किन जमा लेती है, जो बाद में मस्से जैसी बन जाती है और इसमें से कई बार खून निकलने के साथ दर्द भी होता है। 
  • तो वही मल त्याग के दौरान जोर लगाने पर ये मस्से बाहर आ जाते हैं। 

बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर की मदद से भी आप बवासीर की बीमारी के बारे में और विस्तार से जान सकते है।

बवासीर की बीमारी की शुरुआत कैसे होती है ?

इसकी शुरुआत निम्न तरीके से होती है ;

  • बवासीर की शुरुआत होने पर मलाशय में लगातार जलन और सूजन होने लगती है। तो वही इसमें मांसपेशियों में सूजन रहती है, जो कि रह-रह कर जलन पैदा करती है। यह सूजन दर्द और परेशानी का कारण भी बनती है और यहां तक कि उठने-बैठने के दौरान भी समस्या बन जाती है। ये आंतरिक बवासीर और बाहरी बवासीर, दोनों के दौरान हो सकता है।

यदि आपमें भी बवासीर की शुरुआत हो चुकी है तो बेस्ट आयुर्वेदिक क्लिनिक में इसका उपचार करवाए।

बवासीर की बीमारी से निजात दिलवाने में कौन-सी आयुर्वेदिक दवाई है कारगर ?

निम्न आयुर्वेदिक दवाई की मदद से हम बवासीर की समस्या से निजात पा सकते है ;

  • “अर्शकल्प वटी” जोकि एक बेहतरीन बवासीर से निजात दिलवाने वाली आयुर्वेदिक दवा है। इसका उपयोग लोग बवासीर के इलाज में करते है। 
  • वही यह दवा खास आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से मिलाकर बनाई गई है जो बवासीर के सूजन और दर्द को कम करती है। इसके अलावा यह पाचन को भी दुरुस्त रखती है।
  • बवासीर होने की वजह से गुर्दे के आस-पास खून जमने लगता है तो इस खून के जमावट को हटाने के लिए नियमित “कांकायन वटी” दवाई का सेवन करना लाभदायक होता है।
  • “त्रिफला गुग्गुल” पिप्पली, हरीतकी, गुग्गुल, आंवला से मिलकर बनाया गया है। इसका सेवन करने से बवासीर के कारण जो सूजन और दर्द होता है उसको ठीक किया जा सकता है। 
  • बवासीर में “अंजीर” का सेवन दर्द और जलन की समस्या से राहत दिलवाता है।
  • “मंजिष्ठा” रक्त में गंदगी को साफ़ करता है। इसका उपयोग हम बवासीर के अलावा कैंसर, किडनी स्टोन, दस्त, और पेचिश में भी करते है। 
  • “हरीतकी” बेहतरीन आयुर्वेदिक दवाई जो बवासीर में मल के दौरान अप्रत्यक्ष मस्सों की गिनती में कमी लाती है।
  • “अर्शकल्प” का इस्तेमाल करके आप बवासीर की समस्या से निजात पा सकते है। 

आप भी बवासीर की समस्या से निजात पाना चाहते है, तो उपरोक्त दवाइयों को संजीवनी आयुर्वेदा क्लिनिक से लेकर उपयोग में लाए।
निष्कर्ष :

उम्मीद करते है कि आपको पता चल गया होगा की कैसे आयुर्वेदिक दवाइयों की मदद से हम बवासीर की समस्या से खुद का बचाव कर सकते है। इसके अलावा किसी भी तरह की दवाई को प्रयोग में लाने से पहले एक बार डॉक्टर से जरूर सलाह ले।

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आयुर्वेद बवासीर की बीमारी का करेगा जड़ से खात्मा !

  • June 22, 2023

  • 184 Views

पुराने समय से ही आयुर्वेद में विभिन्न दवाइयों का इलाज मिलता आ रहा है, इसके अलावा बीमारी किसी भी तरह की क्यों न हो उसका उपचार मिलना बहुत ही आसान है। तो वही बात करें बवासीर की बीमारी की, तो सबको पता है की ये बीमारी काफी खरतरनक है अगर एक बार व्यक्ति के अंदर उत्पन हो जाए तो काफी परेशानियां खड़ी करती है। इसके अलावा आयुर्वेद में इस बीमारी का क्या हल है इसके बारे में बात करेंगे, इसलिए अगर आप चाहते है की आपको बवासीर की समस्या से निजात मिल सके तो इसके लिए आपको आर्टिकल को अंत तक पढ़ना होगा ;

बवासीर की शुरुआत कैसे होती है ?

  • बवासीर की शुरुआत होने पर मलाशय में लगातार जलन और सूजन का खतरा होता है। इसमें मांसपेशियों में सूजन रहती है, जो कि रह-रह कर जलन पैदा करती है। यह सूजन दर्द और परेशानी का कारण बनती है और यहां तक कि उठने-बैठने के दौरान भी समस्या बन जाती है। ये आंतरिक बवासीर और बाहरी बवासीर, दोनों के दौरान हो सकता है।
  • अगर आपको पता चल गया है कि आपको बवासीर की समस्या हो गई है, तो इसके शुरुआती दौर में ही आप इसका इलाज बेस्ट आयुर्वेदिक क्लिनिक में करवा सकते है। 

बवासीर के मुख्य कारण क्या है ?

  • कब्ज के कारण पेट साफ नहीं होता है और मल त्याग में जोर लगाना पड़ता है जिसकी वजह से बवासीर (पाइल्स) की समस्या हो जाती है। जो लोग ज़्यादा देर तक खड़े होकर काम करते हैं, उन्हें भी बवासीर की समस्या हो जाती है। 
  • दूसरी और प्रेग्नेंसी के दौरान भी कई महिलाएं पाइल्स की समस्या का शिकार हो जाती है।
  • बवासीर की समस्या के और कारणों के बारे में विस्तार से जानने के लिए आप बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से सम्पर्क कर सकते है।

बवासीर के संकेत क्या है ?

  • ब्लीडिंग का होना।
  • गुदा के आसपास सूजन हो सकती है।
  • इससे दर्द और असुविधा हो सकती है।
  • गुदा में खुजली और जलन का महसूस होना आदि। 

बवासीर में कौन-सी आयुर्वेदिक दवाई है कारगर ?

  • बवासीर की वजह से गुर्दे के आस-पास खून जमने लगता है, तो खून की जमावट व सूजन को कम करता है “कांकायन वटी” की आयुर्वेदिक दवा। 
  • “त्रिफला गुग्गुल” का सेवन करने से बवासीर की वजह से जो गुर्दे में जलन और सूजन होती है उसे कम किया जा सकता है और ये इंफेक्शन को भी कम करता है।  
  • “अंजीर” (Fig) पेट से जुड़े विकारों को ख़त्म करके बवासीर के लक्षणों को जड़ से ख़त्म करता है। 
  • “मंजिष्ठा” की दवा रक्त की गंदगी को कम करता है और साथ ही ये बवासीर के अलावा, कैंसर की बीमारी को भी कम करने में सहायक माना जाता है।
  • “हरीतकी” पाचन संबंधी बीमारियों को कम करता है और बवासीर की समस्या से भी निजात दिलवाता है। 
  • जब बवासीर की वजह से गुर्दे में फोड़े हो जाते है जिसकी वजह से मलाशय को निकालने में परेशानी का सामना करना पड़ता है तब आप “सूरन” का उपयोग कर सकते है 
  • “अर्शकल्प” भी बवासीर के लिए बेहतरीन दवाई मानी जाती है। 

अगर आप भी बवासीर की समस्या से निजात पाना चाहते है तो इसके लिए आपको बिना समय गवाएं संजीवनी आयुर्वेदशाला क्लिनिक का चयन करना चाहिए। 

निष्कर्ष :

बवासीर की समस्या काफी गंभीर है इसलिए इससे निजात पाने के लिए आपको उपरोक्त बातो का खास ध्यान रखना चाहिए और किसी भी तरह की दवाई का सेवन करने से पहले डॉक्टर से जरूर सलाह ले।