शरीर को स्वास्थ्य रखने के लिए कौन-सी चीजें कब खाए इसका आयुर्वेद में हुआ बड़ा खुलासा !

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शरीर को स्वास्थ्य रखने के लिए कौन-सी चीजें कब खाए इसका आयुर्वेद में हुआ बड़ा खुलासा !

  • September 9, 2023

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आयुर्वेद जोकि इलाज से लेकर हमारे शरीर का ध्यान रखने तक हमारी काफी मदद करते है और हमारा अच्छे से ख्याल भी रखते है। लेकिन शरीर का ध्यान रखने में हमारा भी थोड़ा सा योगदान होना चाहिए जैसे – अगर आयुर्वेद में बताया जाए की हमे खाने को कैसे और किस प्रकार से खाना चाहिए और कौन-सी चीजों को अपने खाने में हमे शामिल करना चाहिए, तो अगर हमारे द्वारा इन बातों का ध्यान रख लिया जाए तो हमारे शरीर में किसी भी तरह की समस्या नज़र नहीं आ सकती है, तो चलिए जानते है की वो कौन-सी खाने की चीजें है, जो हमारे शरीर के लिए स्वास्थ्य वर्धक है ;

पूरे दिन में किस तरह के खाने का हमारे द्वारा सेवन किया जाता है !

  • आज के युग के बच्चों की बात की जाए तो उनके द्वारा ऐसे खाने की चीजों का सेवन किया जाता है जिनका हमारे सेहत पर गलत प्रभाव ही पड़ता है। 
  • वहीं हम दिनभर में जो भी खाते या पीते है, जरूरी नहीं है कि वह शरीर के लिए फायदेमंद ही हो। 
  • इसलिए आयुर्वेद में हर चीज के खाने-पीने का समय मौसम और लोगों की शारीरिक बनावट के अनुसार तय किया गया है। 
  • आयुर्वेद के अनुसार क्या और कब खाना चाहिए, इसके बारे में “संजीवनी आयुर्वेदशाला क्लिनिक” के डॉक्टर, ‘डॉ आर वात्स्यायन’ से जानें। 

जैसे की जंक या फ़ास्ट फ़ूड की तरफ आज के युवा ज्यादा मोहित हो रहें है, तो अगर इनका सेवन ज्यादा करने की वजह से शरीर में किसी तरह की समस्या आ जाए तो इससे बचाव के लिए आपको बेस्ट आयुर्वेदिक क्लिनिक के सम्पर्क में आना चाहिए।

आयुर्वेद के अनुसार व्यक्ति को किस तरह के आहार को अपने खाने में शामिल करना चाहिए !

  • आयुर्वेद के अनुसार, हर व्यक्ति को अपने भोजन में 6 प्रकार के रस वाले खाने की चीजों को जरूर शामिल करना चाहिए, अगर वो स्वास्थ्य रहना चाहते है तो। 
  • इन 6 चीजों या रसो की बात करें तो इनमे – मधुर यानि (मीठा), लवण (नमकीन), अम्ल (खट्टा), कटु (कड़वा), तिक्त (तीखा) और कषाय (कड़वा या कसैला) खाने को अपने आहार में जरूर शामिल करें। 
  • अगर आपके द्वारा प्रकृति के अनुसार ही भोजन किया जाता है। तो इससे शरीर में पोषक तत्त्व असंतुलित नहीं होते।

आप चाहे तो बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह भी लें सकते है, इन उपरोक्त खाने की चीजों के बारे में।

आयुर्वेद के अनुसार कैसे तैयार करें स्वास्थ्य वर्धक खाना ?

  • आयुर्वेद के अनुसार सब्जियों को ज्यादा पकाने में अधिक समय न लगाएं। ध्यान रखें, सब्जियां न तो ज्यादा पकी हों और न ही ज्यादा कच्ची। 
  • चीनी की जगह शहद या गुड़, और मैदे की जगह चोकरयुक्त आटा और दलिए का सेवन करें।
  • अदरक का एक बिलकुल छोटा-सा टुकड़ा लें और उसे तवे पर भून लें। फिर इस टुकड़े के ठंडा होने के बाद इस पर थोड़ा-सा सेंधा नमक लगाएं। अब इस टुकड़े को खाना-खाने से करीब पांच मिनट पहले खा लें। ऐसा करने से आपके भूख में इजाफा होगा और पाचन सही रहेगा।
  • जंक फूड में सोडियम, ट्रांसफैट और शर्करा की भरमार होती है। इसलिए इन्हें खाने से परहेज करें। मार्केट में मिलने वाले सॉफ्ट ड्रिंक्स से दूरी बनाकर रखें।
  • वहीं खाना हमेशा ताजा और गर्म होना चाहिए। क्युकी यह आपके पाचन के लिए बेहतर होता है।

आयुर्वेद के अनुसार रात के खाने में क्या शामिल करें और क्या नहीं !

  • आयुर्वेद में बताया गया है की रात में ज्यादा भोजन करने से पेट भारी हो जाता है, जिससे ऐसिडिटी और नींद न आने की समस्या उत्पन्न हो जाती है। और इसकी वजह से पाचन तंत्र के गड़बड़ होने की भी शिकायत सामने आती है। 
  • आयुर्वेद के अनुसार रात में हमें सिर्फ लो कार्बोहाईड्रेट वाला खाना ही खाना चाहिए, क्योंकि यह आसानी से पच जाता है। इस तरह के खाने का सेवन हमारे सेहत के लिए भी काफी सहायक माना जाता है।

सुझाव :

बेस्ट आयुर्वेदाचार्य “डॉ आर वात्स्यायन” का कहना है की अगर व्यक्ति अपने शरीर को स्वास्थ्य रखना चाहते है, तो इसके लिए उसे अपने रात के खाने को हल्का रखना चाहिए।यदि खाने की चीजों का अच्छे से ध्यान न रखने की वजह से आपके शरीर में किसी तरह की समस्या आ गई है, तो इससे बचाव के लिए आपको संजीवनी आयुर्वेदशाला क्लिनिक का चयन करना चाहिए।

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हाॅर्मोनल ग्लैंड के फंक्शन में दिक्कत कैसे एंडोक्राइन डिसऑर्डर के लिए खतरा हो सकता है ?

  • September 5, 2023

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एंडोक्राइन सिस्टम शरीर के कई ग्लैंड का नेटवर्क है, जो हाॅर्मोन बनाने के साथ उसे रिलीज करता है, इससे शरीर के अहम अंग प्रभावी रूप से काम करते है। पर हाॅर्मोनल ग्लैंड के सिस्टम में दिक्कत आ जाए तो कैसे ये एंडोक्राइन डिसऑर्डर के लिए खतरा हो सकता है, इसके बारे में आज के लेख में चर्चा करेंगे ;

एंडोक्राइन डिसऑर्डर क्या है ?

  • एंडोक्राइन सिस्टम शरीर के कई ग्लैंड का नेटवर्क माना जाता है, जो हाॅर्मोन बनाने के साथ उसे रिलीज करता है, इससे शरीर के अहम अंग प्रभावी रूप से काम करते है। यहां तक कि यह हमारे शरीर में कैलोरी को एनर्जी में तब्दील कर हमारे अंगों को पावर सेल्स प्रदान करते है। 
  • एंडोक्राइन सिस्टम हमारे शरीर के अंगों को प्रभावित करता है। इसके तहत हमारा हार्ट बीट, हडि्डयों व टिशू के विकास और शिशु के विकास में मदद करता है। डायबिटीज और थायराइड डिजीज, ग्रोथ डिसऑर्डर, सेक्सुअल डिसफंक्शन के साथ हाॅर्मोन संबंधी बीमारी के होने में एंडोक्राइन सिस्टम अहम रोल अदा करते है, इससे जुड़ी किसी प्रकार की बीमारी और समस्या को एंडोक्राइन डिसऑर्डर के नाम से जाना जाता है।
  • अगर आप एंडोक्राइन डिसऑर्डर की समस्या से ग्रस्त है, तो इससे बचाव के लिए आपको बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से जरूर संपर्क करना चाहिए।

हाॅर्मोनल ग्लैंड में दिक्कत किन कारणों से आती है ?

  • हार्मोन्स हमारे शरीर को संतुलित बनाए रखने में मदद करते है। हार्मोन्स एंडोक्राइन ग्रंथि में बनते है। यह रक्त द्वारा शरीर में पहुंचकर अलग-अलग भागों को कार्य करने के निर्देश देते है। अगर हार्मोन्स अंसतुलित हो जाए तो हमें कई गंभीर बिमारियों का सामना करना पड़ सकता है। हार्मोन्स के असंतुलित होने के कई कारण होते हैं। इसलिए, हमें इस बात का बेहद ध्यान रखना चाहिए कि हार्मोन्स को कैसे संतुलित रखा जाए। 
  • वहीं जब हमारे द्वारा असंतुलित खाना-खाया जाता है, तो भी हमारे हार्मोन्स पर इसका गलत प्रभाव पड़ता है।

एंडोक्राइन डिसऑर्डर के बढ़ने और घटने के क्या कारण है ?

  • एंडोक्राइन फीडबैक सिस्सटम के फीडबैक से जुड़ी समस्या के कारण एंडोक्राइन डिसऑर्डर का होना। 
  • किसी बीमारी के कारण होना। 
  • ग्लैंड का सही प्रकार से हाॅर्मोन का रिसाव न कर पाने की स्थिति में एंडोक्राइन डिसऑर्डर का होना। 
  • जेनेटिक डिसऑर्डर, जैसे एंडोक्राइन नियोप्लेसिया (पुरुषों में) और कंजेनाइटल हायपोथायरायडिज्म। 
  • इंफेक्शन के कारण। 
  • एंडोक्राइन ग्लैंड में इंज्युरी होने के कारण भी इस तरह की समस्या का सामना करना आपको पड़ सकता है। 
  • एंडोक्राइन ग्लैंड में ट्यूमर होने के कारण भी एंडोक्राइन डिसऑर्डर बढ़ जाते है। 

एंडोक्राइन डिसऑर्डर की टेस्टिंग को करवाना क्या है ?

  • यदि आपको एंडोक्राइन डिसऑर्डर है तो आपके डॉक्टर आपको एंडोक्रोनोलॉजिस्ट स्पेशलिस्ट के पास जाने की सलाह दे सकते है। एंडोक्राइन सिस्टम से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने में एंडोक्रोनोलॉजिस्ट अहम भूमिका अदा करते है। 
  • एंडोक्राइन डिसऑर्डर के लक्षण इस बात पर निर्भर करते है कि समस्या किस ग्लैंड से जुड़ी हुई है। एंडोक्राइन डिसऑर्डर और डिजीज से ग्रसित व्यक्ति खासतौर पर थकान और कमजोरी की शिकायत करते है।           
  • इस मामले में हमारे डॉक्टर हमें ब्लड और यूरीन टेस्ट का सुझाव भी दे सकते है। ताकि हमारे हाॅर्मोन लेवल की जांच कर यह पता कर सकें कि लोगों को एंडोक्राइन डिसऑर्डर है या नहीं। 
  • इस टेस्ट को आप बेस्ट आयुर्वेदिक क्लिनिक में जाकर भी करवा सकते है, पर इसके लिए आपको अनुभवी डॉक्टर का चयन करना चाहिए।

हाॅर्मोनल ग्लैंड का एंडोक्राइन डिसऑर्डर से क्या है आपसी संबंध ?

दोनों का आपस में गहरा संबंध है, क्युकी हाॅर्मोनल के बिना हमारे शरीर का विकास हो पाना काफी मुश्किल है, तो वहीं एंडोक्राइन डिसऑर्डर का भी इसी के साथ गहरा संबंध है।

सुझाव :

आपके शरीर में हार्मोन का विकास अच्छे से हो रहा है या नहीं इसके बारे में जानने के लिए आप डॉक्टरों का चयन जरूर से करें, पर ध्यान रहें डॉक्टर का अनुभव काफी सालों का होना चाहिए, तभी उस डॉक्टर के द्वारा किया गया इलाज आपके लिए फायदेमंद साबित होगा।

हाॅर्मोनल ग्लैंड और एंडोक्राइन डिसऑर्डर के इलाज के लिए बेस्ट क्लिनिक !

आप चाहें तो अपने एंडोक्राइन डिसऑर्डर को ठीक करने के लिए संजीवनी आयुर्वेदशाला क्लिनिक का चयन कर सकते है, लेकिन ध्यान रहें स्थिति को ज्यादा गंभीर होने न दे।